नई दिल्ली (ऊर्जाधानी पत्रिका) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में बड़ा फैसला लिया गया। कैबिनेट ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके लिए सरकार ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971’ में संशोधन करेगी।
क्या बदलेगा संशोधन के बाद।
1. कानूनी सुरक्षा: अभी तक राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के अपमान पर 3 साल तक की जेल या जुर्माने का प्रावधान है। संशोधन के बाद ‘वंदे मातरम्’ के अपमान पर भी यही सजा लागू होगी।
2. प्रोटोकॉल में बदलाव: सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और विधानसभाओं में ‘जन गण मन’ के साथ ‘वंदे मातरम्’ के गायन को भी अनिवार्य किया जा सकता है। दोनों के समय खड़ा होना जरूरी होगा।
3. ऐतिहासिक दर्जा बहाल: 26 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने ‘जन गण मन’ को राष्ट्रगान और ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगीत घोषित किया था। अब दोनों का कानूनी दर्जा बराबर होगा।
सरकार का तर्क
सूत्रों के मुताबिक सरकार का कहना है कि ‘वंदे मातरम्’ ने 1857 से 1947 तक स्वतंत्रता संग्राम में देश को एक सूत्र में बांधा। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय रचित इस गीत ने लाखों क्रांतिकारियों को प्रेरणा दी। इसलिए शहीदों के सम्मान में इसे राष्ट्रगान के बराबर दर्जा देना जरूरी है।
कानूनी पेंच भी
कांग्रेस ने 1937 में ‘वंदे मातरम्’ के पहले दो पैरा ही अपनाए थे, क्योंकि कुछ समुदायों को आपत्ति थी। 2017 में सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य नहीं किया जा सकता। नए संशोधन को संसद से पास कराना होगा, जहां इस पर बहस तय मानी जा रही है।
आगे की राह
कानून मंत्रालय जल्द ही संशोधन विधेयक का ड्राफ्ट तैयार कर संसद के मानसून सत्र में पेश करेगा। लोकसभा और राज्यसभा से पास होने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही यह कानून बन जाएगा।

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