कोरबा/पाली (ऊर्जाधानी पत्रिका) 29 अप्रैल 2026: छात्राओं की सुरक्षा को लेकर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं। 2018 में आपत्तिजनक स्थिति में पकड़े गए प्राचार्य मनोज सराफ को पूर्व कलेक्टर अब्दुल हक ने छात्राओं वाले स्कूल में पोस्टिंग न देने के सख्त निर्देश दिए थे। इसके बावजूद 2019-20 से वे 70% छात्राओं वाले पाली हाईस्कूल में पदस्थ हैं।
क्या है पूरा मामला:-
2018 की घटना: तब तानाखार हाईस्कूल में पदस्थ प्राचार्य मनोज सराफ को 3 जून 2018 को स्कूल भवन में एक युवती के साथ आपत्तिजनक हालत में ग्रामीणों ने पकड़ा था। कटघोरा पुलिस ने प्रतिबंधात्मक कार्रवाई कर SDM कोर्ट में पेश किया, जहां जमानत खारिज होने पर उन्हें 67 घंटे 50 मिनट जेल में रहना पड़ा था।
कलेक्टर की कार्रवाई: तत्कालीन कलेक्टर मोहम्मद कैसर अब्दुल हक ने बिलासपुर संभागायुक्त को विस्तृत रिपोर्ट भेजी और शिक्षा विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए कि सराफ को छात्राएं अध्यनरत वाले स्कूल में पदस्थ न किया जाए। छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1966 के तहत उन्हें निलंबित कर DEO कार्यालय अटैच किया गया था।
निर्देश की अनदेखी: 2019-20 में बहाली के बाद कलेक्टर अब्दुल हक के ट्रांसफर और किरण कौशल की पोस्टिंग के साथ ही शिक्षा विभाग ने सराफ को 70% छात्राओं वाले पाली हाईस्कूल में पदस्थ कर दिया।
छात्रों का विरोध: 2021 में पाली हाईस्कूल के छात्र-छात्राओं ने सराफ के आचरण के खिलाफ आंदोलन किया। उन्हें हटाकर DEO कार्यालय अटैच किया गया, लेकिन 2022 में वे फिर पाली हाईस्कूल में पोस्टिंग कराने में सफल रहे और तब से वहीं जमे हैं।
उठ रहे सवाल:
1. कलेक्टर के स्पष्ट निर्देश के बावजूद सराफ को छात्राओं की अधिक संख्या वाले स्कूल में क्यों पदस्थ किया गया?
2. छात्र-छात्राओं के विरोध के बाद हटाए जाने पर दोबारा उसी स्कूल में पोस्टिंग कैसे मिली?
3. शीर्ष अधिकारियों का सराफ पर और सराफ का पाली हाईस्कूल के प्रति इतना मोह क्यों?
स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन से इस मामले में गंभीरता से जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

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