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महिला वनकर्मी से दुर्व्यवहार का मामला: वनरक्षक पर जातिगत गाली-गलौच, धमकी और शिकायत वापस लेने के दबाव का आरोप।



कोरबा/बिलासपुर, 18 अप्रैल 2026 (आई.बी.एन-24):  अनुसंधान एवं विस्तार वनमण्डल की कोरबा इकाई में पदस्थ एक महिला वनकर्मी ने बिलासपुर वनमण्डल में पदस्थ वनरक्षक चंद्रहास तिवारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता का आरोप है कि वनरक्षक ने उसके साथ दुर्व्यवहार, अमर्यादित एवं अश्लील गाली-गलौच, जातिगत अपमान और जान से मारने की धमकी दी।


घर पहुंचकर की लोकलज्जा भंग।

शिकायत के अनुसार, आरोपी वनरक्षक कोरबा स्थित पीड़िता के घर पहुंचा और माता-पिता व परिजनों के सामने अश्लील शब्द कहकर लोकलज्जा भंग की। घटना की शिकायत तत्कालीन मुख्य वन संरक्षक, बिलासपुर वन वृत्त को की गई थी, लेकिन पीड़िता का आरोप है कि आज दिनांक तक कोई कार्यवाही नहीं हुई।


शिकायत वापस लेने का दबाव, पैसे का प्रलोभन-:  

पीड़िता ने बताया कि घटना के बाद वनरक्षक चंद्रहास तिवारी, वनपाल वेद प्रकाश शर्मा, वनपाल हाफिज खान, वनपाल लोकमणि त्रिपाठी, वनरक्षक ओशिन रानी सिंह को लेकर उसके घर पहुंचा। सभी ने शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया। आरोप है कि वेद प्रकाश शर्मा एवं ओशिन रानी सिंह ने रकम लेकर मामला रफा-दफा करने की बात कही।


शिकायत में यह भी उल्लेख है कि तत्कालीन उप वनमण्डलाधिकारी श्री प्रहलाद यादव (सेवानिवृत्त) ने भी पीड़िता से कहा कि _“कितनी भी राशि लेना है ले लो पर अपना केस वापस ले लो”_, जिससे आहत होकर पीड़िता अपने घर लौट गई।


भयभीत पीड़िता ने फिर जुटाई हिम्मत।

लगातार दबाव और कार्यवाही न होने से पीड़िता न्याय की उम्मीद छोड़ चुकी थी। अब परिवार से चर्चा कर हिम्मत जुटाते हुए उसने उच्च अधिकारियों के समक्ष पुनः शिकायत पत्र प्रस्तुत किया है।


न्याय की मांग

पीड़िता ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक से करबद्ध प्रार्थना की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम एवं विभागीय नियमों के तहत कड़ी कार्यवाही की जाए और उसे कार्यस्थल पर सुरक्षा प्रदान की जाए।


विभाग की चुप्पी पर सवाल।

मामले में सबसे गंभीर बात यह है कि पहली शिकायत के बाद भी विभागीय स्तर पर कोई कार्यवाही नहीं हुई, उल्टा पीड़िता पर ही समझौते का दबाव बनाया गया। अब देखना होगा कि वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।



एडिटर नोट-: पीड़िता की पहचान गोपनीय रखी गई है। मामला महिला उत्पीड़न एवं SC/ST एक्ट से जुड़ा होने के कारण संवेदनशील है।

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