कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा (ऊर्जाधानी पत्रिका) जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पुटुवा में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी राशि के दुरुपयोग का बड़ा मामला सामने आया है। पंचायत में वर्ष 2021 में लगभग 10 लाख रुपये की लागत से बनाई गई एक पुलिया को लेकर ग्रामीणों ने भ्रष्टाचार और मनमानी के गंभीर आरोप लगाए हैं।
खेत के लिए 10 लाख की पुलिया, मुख्य मार्ग बदहाल
ग्रामीणों के अनुसार यह पुलिया किसी सार्वजनिक मुख्य मार्ग पर नहीं, बल्कि डुग्गुपारा सोढ़ी नदी से बनखेता मार्ग पर सिर्फ एक निजी खेत की पानी निकासी के लिए बनाई गई है। हैरानी की बात ये है कि गांव में कई ऐसे सार्वजनिक रास्ते हैं जहां रोजाना सैकड़ों लोगों का आना-जाना है, लेकिन आज तक वहां पुल नहीं बन पाया। बरसात के दिनों में ग्रामीण घुटनों तक पानी में चलने को मजबूर हैं, स्कूली बच्चे और बीमार लोग परेशान होते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान पर 10 लाख की पुलिया बनाई गई, वहां महज दो सीमेंट पाइप डालकर भी काम चल सकता था, क्योंकि वह न तो मुख्य मार्ग है और न ही वहां नियमित आवागमन होता है।
पूर्व सरपंच-वर्तमान सचिव पर उठे सवाल
बताया जा रहा है कि यह निर्माण पिछले पंचवर्षीय में पूर्व सरपंच और वर्तमान सचिव के कार्यकाल में कराया गया। जब इस संबंध में वर्तमान सचिव से पूछा गया तो उन्होंने कहा – "जहां के लिए स्वीकृति मिली, वहीं निर्माण कराया गया।"
लेकिन ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर ऐसी जगह के लिए स्वीकृति मिली ही क्यों, जहां इसकी जरूरत नहीं थी? और जहां पूरे गांव का मुख्य मार्ग है, वहां बार-बार प्रस्ताव देने के बावजूद स्वीकृति क्यों नहीं मिली?
स्वीकृति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल
सबसे बड़ा सवाल तकनीकी और प्रशासनिक स्वीकृति पर उठ रहा है।
1. बिना जनउपयोग के 10 लाख का एस्टीमेट कैसे पास हुआ?
2. ग्राम सभा में क्या इस कार्य का प्रस्ताव रखा गया था?
3. इंजीनियर और जनपद के अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण क्यों नहीं किया?
ग्रामीणों में आक्रोश, जांच की मांग
इस पूरे मामले को लेकर पुटुवा के ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि:
1. पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए
2. दोषी सरपंच, सचिव और तकनीकी अधिकारियों पर FIR दर्ज कर राशि की वसूली की जाए
3. वास्तविक जरूरत वाले स्थानों पर प्राथमिकता से पुल-पुलिया का निर्माण हो
विकास या सिर्फ कागजी खेल...?
पुटुवा पंचायत में लगातार उठ रहे सवाल यह संकेत दे रहे हैं कि धरातल पर विकास कम और कागजों में ज्यादा दिखाया जा रहा है। 10 लाख रुपये से गांव के मुख्य मार्ग की समस्या हल हो सकती थी, लेकिन राशि को निजी हित में खर्च कर दिया गया।



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